सोमवार को बीएसई का सेंसेक्स 472.77 अंक, यानी 0.66 प्रतिशत चढ़कर 72,382.47 पर बंद हुआ और चार सत्रों की गिरावट थम गई। एनएसई का निफ्टी 50 133.80 अंक, यानी 0.60 प्रतिशत बढ़कर 22,421.95 से 22,555.75 पर पहुँचा। संस्थानों ने इस उछाल की वजह कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, सभी क्षेत्रों में खरीदारी और अमेरिका की कमज़ोर रोज़गार रिपोर्ट को बताया, जिससे फ़ेड की तेज़ सख्ती की उम्मीदें घटीं। आईटीसी सबसे ज़्यादा चढ़ा, करीब 5 प्रतिशत, क्योंकि सिटी ने उसे ‘बेचो’ से ‘खरीदो’ किया और लक्ष्य बढ़ाकर 300 रुपये किया; सिटी के अनुसार सिगरेट पर कर बढ़ने के बाद कमाई के अनुमान घटाए जाने का दौर खत्म हो चुका है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक शुद्ध बिकवाल बने रहे। पीटीआई की अनंतिम गिनती में रुपया पाँच पैसे कमज़ोर होकर 96.30 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि रॉयटर्स के अनुसार यह 96.3150 के मुकाबले 96.2925 रहा। डॉलर इंडेक्स 17 महीने के उच्च स्तर के पास था और माना जा रहा है कि आरबीआई हस्तक्षेप कर रहा था। मौद्रिक नीति समिति बुधवार को अपना फ़ैसला सुनाएगी।
बाज़ार चार सत्रों में तेल और रुपये की वजह से करीब 3 प्रतिशत गिरा था, इसलिए सोमवार राहत भर था, रुझान नहीं। आगे की चाल तीन बातों से तय होगी: आरबीआई का फ़ैसला, ब्रेंट की कीमत, और क्या विदेशी निवेशक बिकवाली रोकते हैं। आरबीआई के सामने असहज विकल्प है। दर बढ़ाने से रुपये को सहारा मिलेगा और महँगाई ठंडी होगी, पर तब कर्ज़ भी महँगा होगा, जबकि विकास की रफ़्तार पहले से धीमी पड़ रही है।
अगर आपका होम लोन फ़्लोटिंग दर पर है, तो 25 आधार अंक की बढ़ोतरी से आम तौर पर एक-दो बिलिंग चक्र में आपकी ईएमआई या कर्ज़ की अवधि बढ़ जाती है। अगर आपके पास म्यूचुअल फंड हैं, तो एक दिन के उछाल से ज़्यादा फ़र्क नहीं पड़ता; यह बढ़त पिछले हफ़्ते की गिरावट का कुछ हिस्सा ही पाटती है। आरबीआई दर बढ़ाए, तो फ़िक्स्ड डिपॉज़िट की दरें थोड़ी चढ़ सकती हैं।
तेल नरम पड़ रहा है, अमेरिकी दरों का डर घट रहा है और आईटीसी की अपग्रेड रेटिंग दिखाती है कि मूल्य में खरीदारी लौट रही है। बुधवार को दर बढ़ी भी, तो उसका असर पहले ही कीमतों में होगा, और बाज़ार उससे आगे देख सकता है।
विदेशी पैसा अब भी निकल रहा है, रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के पास है और ब्रेंट 100 डॉलर के आसपास है। चार खराब सत्रों के बाद एक अच्छा सत्र तली नहीं होता। आरबीआई का फ़ैसला पूरी तिमाही की दिशा तय कर सकता है।
दो संख्याएँ: 96.30 और 5.50। पहली बताती है कि रुपया कहाँ खड़ा है, जिसे आरबीआई साफ़ तौर पर थामे हुए है; दूसरी रेपो दर है, अगर 61 में से 35 अर्थशास्त्री सही निकले। अगर आरबीआई दर बढ़ाए और रुपया फिर भी कमज़ोर हो, तो सबक यह होगा कि अकेली ब्याज दरें 100 डॉलर के तेल की भरपाई नहीं कर सकतीं। गवर्नर के सुर पर उतना ही ध्यान दें, जितना संख्या पर।
Business Standard (सेंसेक्स 72,382.47, निफ्टी 22,556) · TradingView पर Moneycontrol (Taking Stock) · BBN Times · Daily Financial · Trading Economics (एफपीआई की निकासी, आईटीसी) · HDFC Sky और Daily Excelsior पर PTI (रुपया 96.30) · MarketScreener पर Reuters (96.2925; आरबीआई सर्वे) · Business Upturn (सिटी का लक्ष्य) (सभी 5 अक्टूबर) · Whalesbook आठ दिन गिनता है; बाकी चार
सेंसेक्स 473 अंक उछला, निफ्टी 22,556 पर बंद; गिरावट का सिलसिला थमा। बुधवार को आरबीआई का फ़ैसला
कच्चे तेल में नरमी और अमेरिका की कमज़ोर रोज़गार रिपोर्ट से फ़ेड की तेज़ दरवृद्धि का डर घटा। सिटी की अपग्रेड रेटिंग पर आईटीसी करीब 5 प्रतिशत चढ़ा। रुपया लगभग स्थिर रहा और विदेशी निवेशक बिकवाली करते रहे।
सोमवार को लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाज़ार उछले। बीएसई का सेंसेक्स 472.77 अंक, यानी 0.66 प्रतिशत चढ़कर 72,382.47 पर बंद हुआ; पिछला बंद 71,909.70 था। एनएसई का निफ्टी 50 133.80 अंक, यानी 0.60 प्रतिशत बढ़कर 22,555.75 पर रहा। एक बाज़ार रिपोर्ट के अनुसार गिरावट के चार सत्रों में सेंसेक्स करीब 2.7 प्रतिशत और निफ्टी करीब 3.1 प्रतिशत फिसला था। कई समाचार संस्थानों ने कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, सभी क्षेत्रों में खरीदारी और अमेरिका की कमज़ोर रोज़गार रिपोर्ट को वजह बताया, जिससे अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व (Fed) की तेज़ दरवृद्धि के दाँव कमज़ोर पड़े। एक संस्थान ने गिरावट को आठ दिन लंबी बताया; ज़्यादातर ने चार सत्र गिने, और हमने चार ही लिए हैं।
आईटीसी सबसे आगे रहा। सिटी (Citi) ने उसकी रेटिंग ‘बेचो’ से बढ़ाकर ‘खरीदो’ की और लक्ष्य मूल्य बढ़ाकर 300 रुपये किया। उसका तर्क है कि सिगरेट पर कर में भारी बढ़ोतरी के बाद कमाई के अनुमान घटाए जाने का दौर लगभग खत्म हो गया है। इसके बाद शेयर करीब 5 प्रतिशत चढ़ा। पुराने लक्ष्य पर संस्थानों में मतभेद है (270 या 280 रुपये)। रुपया डॉलर के मुकाबले 96.30 पर लगभग स्थिर बंद हुआ; पीटीआई (PTI) की अनंतिम गिनती में यह पाँच पैसे कमज़ोर है, और माना जा रहा है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) उतार-चढ़ाव को थाम रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली जारी रही, और घटता विदेशी मुद्रा भंडार रुपये को बचाने में आरबीआई की लागत दिखाता है। अब सबकी नज़र मौद्रिक नीति समिति पर है, जो बुधवार सुबह 10 बजे अपना फ़ैसला सुनाएगी। सितंबर के आखिर में रॉयटर्स (Reuters) के 61 अर्थशास्त्रियों के सर्वे में 35 ने रेपो दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई, जिससे दर 5.50 प्रतिशत हो जाएगी। फ़रवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी होगी।